Thursday, October 18, 2012

बिहार के छात्रसंघ नई शुरुआत करने को आंदोलित



पटना विश्वविद्यालय
पटना विश्वविद्यालय ने छात्रसंघ चुनाव की तारीख घोषित कर दी है। वह दिन 11दिसंबर है। जब पटना विश्वविघालय के छात्रसंघ 29 वर्षों से मृत पड़ी छात्र राजनीति को दोबारा जीवित करेंगे। लोकतंत्र की सेमनरी में छात्र राजनीति के स्वर एक बार फिर गुजेंगे। छात्रसंघ को यह उपलब्धि लंबे संघर्ष के बाद प्राप्त होइ है। बिहार के छात्र इसके लिये विश्वविद्यालय से लेकर राजभवन और मुख्यमंत्री आवास तक अपनी आवाज बुलंद करते रहे हैं। इनकी आवाज को विश्वविद्यालय प्रशासन,राजभवन और पिछली सरकार अनसुनी या नकारती रही है। वर्तमान मुख्यमंत्री और शिक्षामंत्री बधाई के पात्र हैं। उन्होंने इस दिशा में पहल की है। वहीं पटना विश्वविद्यालय के कुलपति भी पहल करने के लिये बधाई योग्य हैं।

बिहार में 14विश्वविद्यालय राज्यशासित हैं। दो केन्द्रीय विश्वविद्यालय केन्द्र सरकार ने बिहार की झोली में दिये हैं,इन में एक में सत्र प्रारंभ है। इसके अतिरिक्त एक और केन्द्रीय विश्वविद्यालय  बिहार को मिला है। केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रशासन अभी भी निंद्रा से जागे नहीं हैं।
बिहार ने विश्व को लोकतंत्र की सीख दी है। इस राज्य का जिला वैशाली का वज्जि महासंघ अपने गणतंत्रीय संविधान के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज है। यहां विश्व की पहली लोकशाही स्थापित थी। बिहार में लोकतंत्र के मजबूत होने का यही एक प्रमाण नहीं है।  1974-75 में भारतीय लोकतंत्र पर आपातकाल के बादल मंडरा रहे थे। इन्ही वर्षों में जयप्रकाश नारायण के कुशल नेतृत्व में बिहार से भारतीय लोकतंत्र को नई दिशा दी थी। इस आंदोलन से निकले छात्र नेता आज के केन्द्रीय राजनीति की ऊचाईंयों को छू रहे हैं वहीं राज्य राजनीति में राज्य के मुखिया भी हैं। मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, विपक्षी पार्टी के नेता छात्र राजनीति से उभरे नेता हैं। इतिहास के गर्भ में दूसरे राज्यो से हम आगे हैं।
वर्तमान में हमारे सामने कई प्रश्न हैं। बिहार की शिक्षा व्यवस्था अपने निचले पायदान पर है। विश्वविद्यालय में आधारभूत संरचना ढह चुकी है। पटना विश्वविद्यालय के पटना कॉलेज,बीएन कॉलेज, साइंस कॉलेज समेत अन्य कॉलेजों के भवन जर्जर अवस्था में जा चुके हैं। बरसात का पानी इन भवनों को एक प्रीमियर कॉलेज योग्य नहीं रहने देता है। शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मियों के पद खाली हैं। राज्य में उच्च शिक्षा के मद में 300 करोड़ रुपये में 250 करोड़ रुपये वेतन और पेंशन में खर्च हो रहे हैं। कैम्पस में शैक्षणिक माहौल नहीं है। शिक्षक अपने स्वार्थ की राजनीति में उलझे नजर आते हैं। यही हाल प्रशासन का है। क्या-ये मुद्दे छात्र राजनीति के चुनावी मुद्दे बनेंगें ? इनका समाधान छात्रसंघ करा पाने में सफल होगा। ये आने वाला समय उतर देगा। छात्र राजनीति कितनी खड़ी उतरेगी- छात्र समुदाय के लिये एक यह अवसर भर है।
शिक्षा का उद्देश्य सरल भाषा में एक सफल छात्र समाज को उपलब्ध कराना है। ये सफल छात्र किताब पढ़कर और लेक्चर सुनकर समाज को नहीं मिल सकते हैं। छात्रों को अपने सरोकार के साथ सामाजिक सरोकार के लिये प्रयत्नशील होना होगा। जो अभिभावक छात्रों को सिर्फ पढ़ाई पर फोकस करने की बात करते है। वह विशेष छात्र और विशेष समाज की परिकल्पना में जीते हैं। जो समाजिक समानता से उन्हें दूर ले जाती है। छात्रों की शिक्षा का मूल्य मानवीय समाज की सभी प्रकार की समस्याओं का समाधान प्राप्त करना है यह तभी संभव है- जब छात्र, समाज और समस्याओं को एक साथ देखना और समझना सीखेंगे।

Thursday, September 27, 2012

कैंपस मेरे विचारों की जन्मभूमि






बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय
कैंपस युवा पीढ़ी की धड़कन है। इन कैंपस में मानव समाज का भविष्य अपने बहुमुल्य पल व्यतीत करता है। इन अनमोल पलों में वह शिक्षा,खेल और मनोरंजन का एक साथ आनंद लेता है। लोकतांत्रिक भारत के राज्य बिहार के जिला नालंदा से संसार को कैंपस की आधारशिला मिलती है। प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहर इसकी पुष्टि करते हैं।
इन कैंपस में युवा शक्ति अपने दोस्तों के साथ हंसी-मजाक करती है। वहीं विचारों का आदान-प्रदान करते हैं। इसलिए कैंपस में राजनीतिक गतिविधियां,समाजिक परिवर्तन और आर्थिक विकास के मुद्दों को ऊर्जा और नई मंजिल मिलती है।
जहां फैशन की हर नई हवा पहले बहती है और समाज में रचती चली जाती है। जहां सामाजिक कुरीतियों के ताने-बाने टूटते नजर आते हैं। जो सामाजिक परिवर्तन की आहट देते हैं। इन सभी गुणों के कारण कैंपस मानवीय समाज की एक ऐसी संस्था है,जहां मानवीय समाज के नींव कहे जाने वाले छात्रों को शिक्षित और विचारवान बनाया जाता है, साथ ही इन छात्रों को मानवीय मूल्य की सीख भी दी जाती है। ये छात्र अपने  विषय के विद्वान होते हैं वही समाज में उपस्थित समस्या के जानकार होते हैं। इनके अन्दर वो क्षमता होती है कि वह इन समस्या का निदान कर सकते हैं। देश और समाज,इन छात्रों से अपने उज्ज्वल भविष्य की अपेक्षा रखता है।
भारतीय समाज में पायी जाने वाली विविधिता में एकता,इन कैंपस में भी पायी जाती है। यहां छात्र और छात्राएं अपनी पृष्ठभूमि से आते हैं और दूसरे छात्र-छात्राओं से घुलमिल जाते हैं एक-दूसरे के संस्कार और रीतियों के जानकार हो जाते हैं। ये परिवर्तन उनमें कब आया उन्हें पता भी नहीं चलता है। कैंपस संस्कृति के वाहक होते हैं। वहीं नई संस्कृति भी बनाते हैं।      
                                                                                              

Friday, August 20, 2010

To day Talk

Good Noon,
All my dear friends today start this blog to communicate all of you,so visit & write.
yours truly,
 S M Monis